*मकर संक्रांति*

*बुन्देलखण्ड में मकर संक्रांति*
मकर संक्रांति को बुन्देलखण्ड में *बुड़की* कहा जाता है।
  हमारे बुंदेलखंड में मकर संक्रांति पर्व बहुत हर्ष उल्लास से मनाया जाता है, इस दिन भारी ठंड होने के बाद भी सुबह से नदी तालाब या कुवां में स्नान करने के लिए बच्चों, बूढ़ों और जवानों मे उत्साह देखते ही बनता है ।
कई दिन पहले से घरों में विविध प्रकार के पकवान, यथा गुजिया, खुरमा, पपरिया, तिल,बेसन, लाई, सूजी, कठिया गेहूं आदि के लड्डू बनाए जाते, सुबह से पूड़ी, ठडूला, और खिचड़ी अनिवार्य है फिर मेला और मेला से बराई (गन्ना) लेना कोई नहीं भूलता है
हां एक विशिष्ट परम्परा है कि उस दिन हमारी बुआ, बहिनें और बेटियां सभी  *गड़िया घुल्ला* 
(शक्कर से बनी एक प्रकार की मिठाई)जरूर लाती हैं।
इस दिन कुम्हार/प्रजापति (मिट्टी के बर्तन बनाने वाले) मिट्टी के घोड़ा और बड़े दीपक भी लाते हैं।
हम इन सभी कार्यों को प्रथा के रुप में बचपन से देखते आ रहे हैं ,
कई बार इस पर्व का अर्थ समझने की कोशिश की कई लोगों से जानना चाहा, किन्तु जवाब नहीं मिला।
फिछले वर्ष अपने विद्यालय में बैठा था कि उसी समय वहां से एक आदरणीय बृद्ध सज्जन निकले जिन्होंने हमारे साथी शिक्षक जी को बताया कि हमने आपके वहां गढ़िया घोड़ा पहुंचा दिए हैं, मैने उनसे जानना चाहा कि मिट्टी के घोड़ा तो हमारे यहां भी आते हैं लेकिन ये गड़िया क्या है तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां ठाकुरों के घर पर हर मकर संक्रांति (बुडकी) पर मिट्टी से बने गड़िया और घोड़ा दिए जाते हैं।
तब जाकर मैने सारी कहानी समझी ।
सार हमारे बुंदेलखंड में गड़िया का शाब्दिक अर्थ महल से है, जबकि घोड़ा शक्ति का प्रतीक है।
इस दिन जो मिठाई (गड़िया घुल्ला) बनती है वह भी हाथी, घोड़ा और महल के आकार में होती है अर्थात मकर संक्रांति/बुड़की के दिन हमारी बुआ, बहिनें और बेटियां अपने मायके अपनी तरफ से धन, वैभव और ऐश्वर्य के प्रतीक गड़िया घुल्ला की मिठास मे आपके सुख समृद्धि की कामना भी लाती हैं ।
इसलिए हम लोग भी अपनी बहिन बेटियों को उचित भेंट करते हैं।
बस कुछ ऐसे मानते हैं हम बुंदेलखंडी अपनी *बुङकी*
आप सभी को मकर संक्रांति/बुडकी पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, ईश्वर करें आपकों भी गड़िया घुल्ला प्राप्त हो 😊😊🙏🏻।
सादर 🙏🏻
आपका
हरदयाल पटेल शिक्षक
चलित दूरभाष क्रमांक ९९९३०५०५८७
सटई, छतरपुर मध्य प्रदेश

Comments

Popular posts from this blog

आधुनिक समय में प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालयों की पुकार

कोशिश